LRC歌词

क्या पानी क्या कोई अगन
मैं तो हुई कान्हा तेरी जोगन,
क्या धरती क्या कोई गगन
मैं तो हुई कान्हा तेरी जोगन..

जग भूली मैं तो ओ रे कान्हा !!
करके तुझको नमन

हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"...
हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"
हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"...
हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"

बन के मोर मुकुट में कान्हा
माथे तेरे सज जाऊं,
बन के बांसुरी मेरे कान्हा
होठ तेरे छू जाऊं..

गर ये भी जी ना हो पाए तो
पैरों में तेरे सो जाऊं,
डूब के तुझको ओ रंग रसिया
खुद से ही मैं खो जाऊं..

जग भूली मैं तो ओ रे कान्हा
पाकर तेरी शरण

हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"
हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"
हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"
हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः:

कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः:

文本歌词

क्या पानी क्या कोई अगनमैं तो हुई कान्हा तेरी जोगन,क्या धरती क्या कोई गगनमैं तो हुई कान्हा तेरी जोगन..जग भूली मैं तो ओ रे कान्हा !!करके तुझको नमनहुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"...हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"...हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"बन के मोर मुकुट में कान्हामाथे तेरे सज जाऊं,बन के बांसुरी मेरे कान्हाहोठ तेरे छू जाऊं..गर ये भी जी ना हो पाए तोपैरों में तेरे सो जाऊं,डूब के तुझको ओ रंग रसियाखुद से ही मैं खो जाऊं..जग भूली मैं तो ओ रे कान्हापाकर तेरी शरणहुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"हुई रे हुई मैं तो "प्रेम मगन"कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मनेप्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः:कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मनेप्रणतः क्लेशनाशाय गोविंदाय नमो नमः:

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